Archive for December, 2010

Subhashitam

December 19, 2010

कबीर दोहा

कबीरा गर्व न कीजिये काल गहे कर केस
ना जाने कित मारे है क्या देस क्या परदेस

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Subhashitam

December 19, 2010

कबीर दोहा

कबीरा गर्व न कीजिये ऊंचा देख आवास
काल परों भुई लेटना ऊपर जमसी घास

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Subhashitam

December 18, 2010

कबीर दोहा

जीवत समझे जीवत बूझे जीवत ही करो आस
जीवत करम फांस न काटी मुए मुक्ति की आस

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Subhashitam

December 18, 2010

कबीर दोहा

पोथी पड़ पड़ जग मुआ पंडित भयो न कोए
ढाई आखर प्रेम के जो पड़े सो पंडित होए

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Subhashitam

December 16, 2010

कबीर दोहा

कबीरा खडा बाजार में मांगे सबकी खैर
ना काहू से दोस्ती ना काहू से वैर

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Subhashitam

December 15, 2010

कबीर दोहा

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर

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Subhashitam

December 15, 2010

कबीर दोहा

धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होए
माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए फल होए

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Subhashitam

December 6, 2010

कबीर दोहा

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोए
अपना तन शीतल करे औरन को सुख होए

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Subhashitam

December 6, 2010

कबीर दोहा

काल करे सो आज कर आज करे सो अब
पल में परलय होएगी बहूरी करोगे कब

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Subhashitam

December 6, 2010

कबीर दोहा

माला तो कर में फिरे जीभ फिरे मुख माहिं
मनुआ तो चहु दिश फिरे यह तो सिमरन नाहिं

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